सीरिया: 'आधी आबादी को तुरंत मदद की ज़रूरत'

सीरियाई संघर्ष
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संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने कहा है सीरिया की आधी आबादी यानी लगभग 93 लाख लोगों को मदद की तुरंत ज़रूरत है.

ये बात उन्होंने कुवैत में दान देने वाले देशों के एक सम्मेलन में कही.

संयुक्त राष्ट्र ने सीरियाई संकट से निपटने के लिए साढ़े छह अरब डॉलर की सहायता राशि की मांग की है. संस्था के इतिहास में किसी भी तरह के मानवीय संकट से निपटने की ये अब तक की सबसे बड़ी सहायता अपील है.

बुधवार तक विभिन्न देश दो अरब 40 करोड़ डॉलर देने का वादा कर चुके थे. इनमें कुवैत ने 50 करोड़ डॉलर और अमरीका ने 30 करोड़ आठ लाख डॉलर देने का वायदा किया है.

'गुप्त बातचीत?'

इस बीच सीरिया के उप विदेश मंत्री ने कहा है कि सीरिया में इस्लामी गुटों से निपटने के लिए पश्चिमी देशों की ख़ुफ़िया संस्थाओं ने उसके साथ बातचीत की है.

लेकिन ब्रिटेन की सरकार ने सीरिया के साथ ऐसे किसी सहयोग की बात से इनकार किया है.

अमरीकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मैरी हार्फ़ ने भी सीरियाई मंत्री के दावे को ख़ारिज कर दिया और कहा कि ''उस ख़तरे से निपटने के लिए असद सरकार या उस प्रशासन का साथ देने की बात पर विचार करना बेतुकी बात'' थी.

इन इस्लामी गुटों का सीरिया में दबदबा बढ़ रहा है. इनमें अकसर विदेशी लड़ाके शामिल होते हैं और इनकी अन्य विद्रोही गुटों से झड़पें होती रहती हैं जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता है.

ब्रिटेन में स्थित सीरियन नेशनल ऑबज़र्वेट्री मानवाधिकार संगठन के मुताबिक़ बुधवार को सीरियाई शहर जाराब्लस में एक कार बम धमाके में कम से कम 26 लोगों की मौत हो गई. संगठन ने इस हमले के लिए अल-क़ायदा से जुड़े गुट, इस्लामिक स्टेट इन इराक़ एंड द लेवान्ट, को ज़िम्मेदार ठहराया है और कहा है कि मारे गए ज़्यादातर लोग दूसरे गुटों के विद्रोही थे.

सीरिया की मदद के लिए सम्मेलन

'सबकी ज़िम्मेदारी'

कुवैत सम्मेलन में बान की मून ने कहा कि सीरिया में चल रहे संघर्ष ने ''देश को कई दशक पीछे धकेल दिया है'' और ''इस क्षेत्र और दुनिया के लिए ज़रूरी है कि इस बोझ को सब मिल कर बाँटे''.

सीरिया में अब तक लगभग 65 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं. 23 लाख से ज़्यादा लोगों ने ख़ुद को के तौर पर पंजीकृत किया है. इनमें से कई शिविरों में रह रहे हैं. सीरिया में लड़ाई से प्रभावित शहरों से भुखमरी की ख़बरें आ रही हैं.

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक़ साल 2011 में शुरू हुए संघर्ष में अब तक एक लाख लोगों की मौत हो चुकी है.

संस्था का कहना है कि उसे 2014 में सीरिया के लिए साढ़े छह अरब डॉलर की मदद चाहिए जिसमें से लगभग एक तिहाई यानी दो अरब 40 लाख डॉलर देने का वायदा किया जा चुका है. संयुक्त राष्ट्र का ये भी कहना है कि वो पूरे साल सीरिया के लिए मदद राशि जुटाता रहेगा.

लेकिन सहायता संस्थाओं का कहना है कि सीरिया में मदद पहुंचने के बाद भी वहां इसे बाँटना बहुत मुश्किल होता जा रहा है. उन्होंने सरकार पर कुछ इलाक़ों में जानबूझ कर उनके काम में रुकावट डालने का आरोप लगाया है.

आरोप

ह्यूमन राइट्स वॉच संस्था का कहना है कि सीरियाई सरकार कुछ रसद तो आने दे रही है लेकिन वो ''तुर्की से आने वाली मदद को उत्तरी सीरिया में ज़रूरतमंद लोगों तक नहीं पहुंचने दे रही''. साथ ही प्रशासन अकसर मदद वाली गाड़ियों के काफ़िलों को लंबा रास्ता लेने पर मजबूर करता है.

सीरिया

बुधवार को संयुक्त राष्ट्र की मदद संस्था, उनव्रा, ने कहा कि उसे यारमुक में एक फलस्तीनी शरणार्थी शिविर जा रहे एक काफ़िले पर गोलियां चलने की वजह से दमिश्क से कुछ किलोमीटर पहले ही लौटाना पड़ा.

उनव्रा के क्रिस गनेस ने बीबीसी को बताया कि प्रशासन ने मदद ले जा रही गाड़ियों के काफ़िले को ऐसे रास्ते पर भेजा जहां जिहादी गुट सक्रिय हैं और भारी लड़ाई हो रही है.

विपक्ष की आशंका

बीबीसी की कूटनीतिक मामलों की संवाददाता ब्रिजेट कैन्डल का कहना है कि संघर्ष में फंसे लोगों को अधिक नकद राशि से कहीं ज़्यादा स्थानीय युद्धविराम या मानवीय कॉरीडोर की ज़रूरत है. लेकिन ये अभी साफ़ नहीं है कि अगले सप्ताह जेनेवा में शुरू हो रही अंतरराष्ट्रीय शांति वार्ता से ये हासिल हो पाएगा या नहीं.

मुख्य विपक्ष गठबंधन, नेशनल कोअलिशन, ने शांति वार्ता में हिस्सा लेने के बारे में फिलहाल कोई फ़ैसला नहीं किया है. विपक्ष को डर है इसमें शामिल होने से सीरिया के अंदर सरकार-विरोधी विपक्ष के बीच उनकी विश्वसनीयता कम हो जाएगी.

संवाददाताओं का कहना है कि सीरियाई विपक्ष के बिखराव से पश्चिमी देशों में निराशा और सीरियाई सरकार का आत्मविश्वास बढ़ रही है.

पश्चिमी देशों का कहना है कि सीरिया में चल रही लड़ाई के लिए राष्ट्रपति बशर अल-असद ज़िम्मेदार हैं और उन्हें पद से हटना चाहिए.

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