सीरिया: होम्स से लोगों के भागने का सिलसिला जारी

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सीरिया के होम्स शहर में सरकार और विद्रोहियों के बीच तीन दिन के संघर्ष विराम को बढ़ाने पर हुई सहमति के बाद लगभग और तीन सौ लोगों ने शहर छोड़ दिया है.

पिछले डेढ़ साल से होम्स में दोनों पक्षों के बीच कड़ा संघर्ष चल रहा है जिसके कारण बहुत से आम लोग वहां फंसे हैं.

सीरियाई रेड क्रेसेंट ने होम्स से तीन सौ और लोगों के चले जाने की ट्विटर पर पुष्टि की है. इससे पहले सप्ताहांत पर सैकड़ों आम सीरियाई होम्स से जा चुके हैं.

इस बीच सरकार और विपक्ष के प्रतिनिधियों ने जिनेवा में शांति वार्ता फिर से शुरू की है, लेकिन विश्लेषकों को इसमें प्रगति की आशा बहुत ही कम है.

टकराव

सीरियाई विपक्ष चाहता है कि सरकार ‘2012 जिनेवा कम्युनिक’ नाम के उस ज्ञापन को लेकर लिखिति रूप से प्रतिबद्धता जताए जिसमें सत्ता हस्तांतरण के लिए पूरी शक्तियों वाले एक अंतरिम प्रशासन के गठन की बात कही गई है.

लेकिन राष्ट्रपति बशर अल असद की सरकार सत्ता से हटने के लिए किसी भी तरह से राज़ी नहीं है.

दोनों पक्षों के बीच पहले दौर की वार्ता पिछले महीने बिना किसी सहमति के ख़त्म हो गई.

दूसरे दौर की वार्ता सोमवार को शुरू हुई जिसमें शुरुआती चर्चा बातचीत का एजेंडा तैयार करने को लेकर हुई लेकिन अभी तक दोनों पक्षों का एक दूसरे से आमना-सामना नहीं हुआ है.

सीरिया में मार्च 2011 से संघर्ष चल रहा है जिसमें अब तक एक लाख से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं और लगभग 95 लाख लोग बेघर हो गए हैं.

प्रस्ताव पर असहमति

लोगों को शहर से निकाले जाने के दौरान भी मोर्टार हमले और गोलीबारी की घटना देखने को मिली जिसके लिए दोनों पक्ष एक दूसरे को ज़िम्मेदार बता रहे हैं. विपक्षी कार्यकर्ताओं का कहना है कि इसमें कई लोग मारे गए हैं.

हालांकि पहले दौर की बातचीत में होम्स की स्थिति पर चर्चा हुई थी लेकिन संघर्ष विराम पर सहमति होम्स के गवर्नर तलाल बाराज़ी और सीरिया में संयुक्त राष्ट्र के स्थानीय समन्वयक के बीच हुई.

बाराज़ी ने रविवार को कहा कि इस संघर्ष विराम को और तीन दिन बढ़ाने के लिए वार्ता हो रही है.

बाद में संयुक्त राष्ट्र की सहायता प्रमुख वालेरी अमोस ने पुष्टि की कि संघर्ष विराम को और तीन दिन के लिए बढ़ा दिया गया है.

उधर, फ्रांसीसी विदेश मंत्री लॉरैं फैबियू ने कहा है कि फ्रांस और अन्य देश संयुक्त राष्ट्र में एक प्रस्ताव पेश करेंगे जिसमें सीरिया में अधिक मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए अपील की जाएगी.

लेकिन चीन और रूस ने इस प्रस्ताव को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है. रूसी राजनयिकों का कहना है कि उन्होंने कथित मानवीय सहायता से जुड़े इस प्रस्ताव को पहले ही ख़ारिज कर दिया है.

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