रिहाई के लिए फ़िरौती देना सही?

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सीरिया में अमरीकी पत्रकारों, ब्रितानी सहायताकर्मियों और अल्जीरिया में फ्रांसीसी नागरिक की चरमपंथियों ने अपहरण के बाद हत्या कर दी.
कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने चरमपंथी संगठनों से अपहृतों की रिहाई की अपील की थी, लेकिन उन्हें नहीं छोड़ा गया.
लेकिन ऐसा नहीं है कि चरमपंथी संगठन विदेशी नागरिकों का अपहरण करने के बाद उन्हें रिहा नहीं करते. कई मामलों में अपहृतों को सकुशल रिहा किया गया है.
तो अब सवाल उठता है कि क्या फिरौती देकर इनकी जान बचाई जा सकती थी. या क्या रिहाई के लिए फिरौती देना ठीक है या इससे अपहरण की घटनाओं में इजाफ़ा होगा?
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मई 2009 में सहारा मरुस्थल में इस्लामिक चरमपंथियों का एक दल अपने अस्थाई शिविर में एक ब्रितानी बंधक को मारने की तैयारी कर रहा था.

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ब्रितानी नागरिक एडविन डायर और तीन अन्य यूरोपीय सैलानियों का चार महीने पहले उस वक़्त अपहरण किया गया था, जब वे माली-नाइजर सीमा पर आयोजित एक संगीत कार्यक्रम से लौट रहे थे.
जिस दिन डायर की हत्या की गई, उन्हें शिविर से बाहर लाया गया और एक चरमपंथी ने घोषणा की कि उन्हें मार दिया जाएगा.
फ्रांस के एक पत्रकार सर्ज डेनियर के मुताबिक चरमपंथी ने कहा, "इस्लाम हमें बताता है कि किसी अधर्मी के साथ संबंध मत रखिए....क्योंकि यहां यही मामला है, इसलिए बंधक को अल्लाह के नाम पर मार दिया जाएगा."
एक चश्मदीद ने बताया कि डायर "बहुत डरे हुए थे..उन्हें पता था कि क्या होने जा रहा है."
किस्मत अलग-अलग
डायर को स्विटज़रलैंड के गैब्रिएला बार्को ग्रेनर, वर्नर ग्रेनर और जर्मनी के सेवानिवृत्त शिक्षक मेरिएन पेटज़ोल्ड के साथ बंधक बनाया गया था, लेकिन उनकी किस्मतें अलग-अलग थी.

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पेटज़ोल्ड अपहरण की घटना को याद करती हैं, "मैंने गोलियां चलने की आवाज़ सुनी और देखा कि दो छोटे ट्रक हमारे काफ़िले की तरफ़ आ रहे हैं. एक शख़्स नीचे उतरा और मुझ पर ज़ोर से चीखते हुए नीचे उतरने को कहा. मैं धीरे-धीरे उतरी, क्योंकि मैं आसानी से हार मानने वाली नहीं थी."
वह तब तक रेत पर ही लेटी रहीं, जब तक कि उन्हें बंदूकों और गोलियों से भरे ट्रक में चढ़ने को नहीं कहा गया.
फिर वे पूरे दिन मरुस्थल में गाड़ियां दौड़ाते रहे. पेटज़ोल्ड का चश्मा तो पहले ही टूट चुका था, अपहरणकर्ताओं ने उनके जेवर, घड़ी, जैकेट भी उतरवा लिए.
बंधकों को बेचना
जल्दी ही उन्हें एक दूसरे ग्रुप के हवाले कर दिया गया. उन्हें बताया गया कि अब वे 'अल क़ायदा के बंधक हैं.' उन्हें इस्लामिक चरमपंथियों को बेच दिया गया था.

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पेटज़ोल्ड कहती हैं, "नए अपहर्ता हर बंधक को जानते थे. हमारे पहुंचने से पहले ही शायद उन तक हमारे पासपोर्ट पहुंच चुके थे."
अगले कुछ दिनों तक लगातार चलते रहने के बाद वे एक छोटी घाटी में रुके. दो पेड़ों की छांव में बंधक एक कंबल पर लेट गए. वहां उनकी मुलाक़ात छोटी दाढ़ी रखे एक शख्स से हुई जिन्हें अल क़ायदा इस्लामिक मग़रेब का शीर्ष कमांडर बताया जा रहा था.
बंधकों की तस्वीरें ली गई और हर बंधक की आवाज़ में रिकॉर्ड किया गया "हम अपनी सरकार से कहते हैं कि हमें तुरंत रिहा कराए."
अपहरणकर्ता के अनुवादक ने पेटज़ोल्ड से कहा कि घबराने की ज़रूरत नहीं है और उन्हें जल्द ही छोड़ दिया जाएगा.

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इसके बाद पेटज़ोल्ड के परिजनों को जर्मन अधिकारियों ने बताया कि सरकार अपहरणकर्ताओं के संपर्क में है और उनसे बातचीत जारी है.
इसके बाद क्या हुआ, ये तो स्पष्ट नहीं है. लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी रिहाई के लिए फिरौती दी गई. हालाँकि जर्मन अधिकारियों ने इस मामले में कभी कुछ नहीं कहा.
तीन महीने बाद पेटज़ोल्ड और गैबरिएला ग्रेनर को रिहा कर दिया गया. ग्रेनर के पति को दो महीने बाद जुलाई में रिहा किया गया.
सरकारों की भूमिका
इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि जर्मन सरकार ने फिरौती दी, लेकिन ग्रेनर के मामले में आधिकारिक दस्तावेज हैं कि स्विटज़रलैंड में रकम का आदान-प्रदान हुआ.

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2009 में स्विटज़रलैंड सरकार ने फिरौती देने से इनकार किया और स्विस नागरिकों की रिहाई का श्रेय माली के राष्ट्रपति अमादो तोमानी को दिया.
लेकिन कुछ महीने स्विटज़रलैंड में जारी सरकार की विशेष बैठक के मिनिट्स बताते हैं कि दो स्विस नागरिकों की रिहाई के लिए मंत्रियों ने फिरौती देने पर सहमति जताई थी.
पिछले महीने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड केमरन ने सीरिया में बंधक ब्रितानी नागरिक के बारे में पूछे जाने पर कहा था, "हमारे नागरिकों को बंधक बनाने वाले आतंकवादियों को हम फिरौती नहीं देंगे. मुझे उन परिवारों के लिए दुख है, जिनके परिजनों का अपहरण हुआ है, लेकिन मुझे पता है कि ऐसे अपहरणों से ही ये आतंकवादी संगठन करोड़ों डॉलर कमा रहे हैं."
रिहाई के लिए डील
तो एक तरह की ब्रितानी सरकार का इस नीति ने ही एडविन डायर की किस्मत तय कर दी थी.

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स्थानीय कबीलों का इंटरव्यू करने वाले सर्ज डेनियल के मुताबिक शुरुआत में अपहरणकर्ताओं ने एडविन की रिहाई के लिए 60 लाख पाउंड की मांग की थी.
हाल ही में ब्रिटेन के 63 वर्षीय शिक्षक को रिहा किया गया. वह मई से लीबिया में चरमपंथियों की क़ैद में थे. माना जा रहा है कि उनकी रिहाई के लिए भी फिरौती दी गई, लेकिन कितनी और कैसे यह स्पष्ट नहीं है. हाँ, उनकी रिहाई में ब्रितानी सरकार शामिल नहीं थी.
सितंबर में सीरिया में 46 तुर्की और तीन इराक़ी नागरिकों को रिहा किया गया. उस वक़्त तुर्की के राष्ट्रपति आरटी एरडोगन ने ज़ोर देकर कहा था कि किसी तरह की कोई फिरौती नहीं दी गई है. लेकिन बाद में पता चला कि रिहाई इस्लामिक स्टेट चरमपंथियों को छोड़ने के बदले हुई थी.
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