'भारत के ख़िलाफ़ चरमपंथियों को पाकिस्तान की शह'

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- Author, ब्रजेश उपाध्याय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वॉशिंगटन से
- प्रकाशित
अमरीकी रक्षा मंत्रालय ने एक नई रिपोर्ट में कहा है कि पाकिस्तान ने भारत और अफ़गानिस्तान के ख़िलाफ़ चरमपंथी संगठनों का इस्तेमाल अभी भी जारी रखा है और ये पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए ख़तरा बना हुआ है.
पेंटागन की तरफ़ से अमरीकी कांग्रेस के लिए हर छह महीने पर जारी की जाने वाली इस रिपोर्ट के अनुसार, "पाकिस्तान इन चरमपंथियों का इस्तेमाल अफ़गानिस्तान में अपने घटते प्रभाव और भारत की बेहतर फ़ौजी ताक़त के ख़िलाफ़ कर रहा है."
रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तानी सीमा के अंदर छिपे हुए तालिबान चरमपंथी अभी भी अफ़गानिस्तान में हमले कर रहे हैं और ये पाकिस्तान-अफ़गानिस्तान द्विपक्षीय रिश्तों के लिए बड़ी समस्या बना हुआ है.
पेंटागन की इस रिपोर्ट पर वाशिंगटन में पाकिस्तान दूतावास की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी है.
लेकिन पाकिस्तान कहता रहा है कि इस तरह की बातें बेबुनियाद हैं और वो ख़ुद दहशतगर्दी का शिकार है.
पेंटागन की ओर से छह महीने पहले जारी रिपोर्ट में भी कहा गया था कि पाकिस्तान अपनी ज़मीन पर सक्रिय अफ़गानिस्तान और भारत विरोधी चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं कर रहा है.
लेकिन इस रिपोर्ट में पहली बार रक्षा मंत्रालय ने बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा है कि पाकिस्तान अप्रत्यक्ष रूप से इन ताक़तों का इस्तेमाल कर रहा है.

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रिपोर्ट में नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण से ठीक पहले अफ़गानिस्तान के हेरात शहर में भारतीय वाणिज्य दूतावास पर हुए हमले का भी ज़िक्र है.
रिपोर्ट के अनुसार, "नरेंद्र मोदी हिंदू राष्ट्रवादी संगठनों के करीब माने जाते हैं और संभव है कि इसी वजह से उनके शपथ ग्रहण के समय ये हमला हुआ."
उस हमले का आरोप पाकिस्तान स्थित चरमपंथी संगठन लश्करे तैयबा पर लगा था.
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