एक लड़का, जो चरमपंथी बनना चाहता है

इस्लामिक स्टेट की चरमपंथी गतिविधियों में शामिल किशोर
    • Author, मार्क लोवेन
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़
  • प्रकाशित

तुर्की के दक्षिणी इलाक़े के एक मकान के तंग से कमरे में एक 13 साल का लड़का चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट में शामिल होने की तैयारियों में जुटा है.

जब उन्होंने हमारा स्वागत किया तो वो साफ तौर पर खुश नज़र आ रहे थे. उनके चेहरे पर मुस्कान थी और उन्होंने भूरे रंग की टोपी वाली जर्सी पहन रखी थी.

लेकिन जब हम उनसे बात करने बैठे, तो वे दूसरे कमरे में कपड़े बदलने चले गए.

अब उन्होंने सैनिकों जैसा लिबास पहन रखा था. वो चाहते थे कि उनका परिचय अबू ख़िताब के रूप में कराया जाए.

पढ़ें मार्क लोवेन की पूरी रिपोर्ट

वो सीरिया में पैदा हुए और पिछले साल चरमपंथ की ओर आकर्षित हुए और चरमपंथी संगठन 'सीरिया इस्लाम' में शामिल हो गए.

उन्होंने धार्मिक शिक्षा और हथियार चलाने का प्रशिक्षण लिया है. अबू ने हमें तस्वीर दिखाई, जिसमें उन्होंने एक मशीनगन पकड़ रखी थी.

इस्लामिक स्टेट

इस्लामिक स्टेट

वह अब ऑनलाइन रहते हैं, जहां वे जिहादी वीडियो देखते हैं और सोशल मीडिया वेबसाइट फ़ेसबुक पर इस्लामिक स्टेट के चरमपंथियों से बात करते हैं.

उन्होंने हमें बताया कि वह कुछ हफ़्तों में इस्लामिक स्टेट के गढ़ सीरियाई शहर रक्का पहुंचकर जिहादी बन जाएंगे.

अबू ख़िताब के अनुसार वह इस्लामिक स्टेट को इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि वह शरीयत को बढ़ावा देते हैं और काफ़िरों को मारते हैं, जो सुन्नी मुसलमान नहीं होते और जो इस्लाम छोड़कर दूसरा धर्म अपनाते हैं.

अबू कहते हैं, "इस्लामिक स्टेट ने जिन्हें मारा है, वो अमरीकी एजेंट थे और जैसा कि अल्लाह ने क़ुरान में कहा है उनके सिर ज़रूर क़लम कर देने चाहिए."

इस सवाल पर कि क्या उन्होंने इनको अपनी उम्र के बारे में बताया है जिनसे वह इंटरनेट पर बात करते हैं?

उनका जवाब था, "शुरू में नहीं बताया था पर हाल ही में उन्हें अपनी उम्र के बारे में बताया है और अब वह मुझसे पहले से अधिक संपर्क करते हैं और मुझे तस्वीरें और समाचार भेजते हैं."

अबू का परिवार

इस्लामिक स्टेट की चरमपंथी गतिविधियों में शामिल किशोर

मैंने अबू से पूछा कि वह सादगी से अपना बचपन क्यों नहीं गुज़ारते?

इस पर अबू का जवाब था कि वह अपने दोस्तों के साथ मस्ती नहीं करना चाहते.

"अल्लाह ने हमें काम करने और अगली ज़िंदगी यानी जन्नत के लिए लड़ने का हुक्म दिया है. इससे पहले मैं पार्क वगैरह में जाता था. फिर मैंने सोचा कि मैं ग़लत हूं तो मैंने नेकी का रास्ता चुन लिया."

अबू ख़िताब का परिवार इस वक़्त तुर्की में रहता है. तो क्या वे तुर्की पर हमला करेंगे या ब्रिटेन पर?

इस पर उन्होंने कहा, "ब्रिटेन पर हमला किया जाना चाहिए क्योंकि वह नैटो का सदस्य देश और इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ है. लेकिन हम केवल उन्हें मारेंगे जो इसके लायक होंगे. अगर वो मुझे तुर्की में हमला करने को कहेंगे और मुझे मुकद्दस हुक्म देंगे, तो मैं इस पर अमल करूंगा. जल्द ही पश्चिम ख़त्म हो जाएगा."

अबू की अम्मी

अबू खिताब की मां

अबू ख़िताब अपनी मां के साथ रहते हैं और उनकी मां चाहती हैं कि उन्हें फ़ातिमा के नाम से पुकारा जाए.

फ़ातिमा अपना ज़्यादातर समय क़ुरान की तिलावत में गुज़ारती हैं. उन्होंने माना कि उनकी चरमपंथियों से गहरी सहानुभूति है.

पिछले साल फ़ातिमा ने अपने बेटे को चरमपंथी संगठन सीरिया इस्लाम के साथ प्रशिक्षण के लिए भेजा था, लेकिन उन्होंने उनकी ब्रेन वाशिंग से इनकार किया.

वे ज़ोर देकर कहती हैं कि उन्होंने अपने बेटे पर कभी भी इस्लामिक स्टेट में शामिल होने पर ज़ोर नहीं दिया.

"मैं उनकी कुछ बातों की हिमायत करती हूं, पर दूसरी बातों की नहीं. मेरे विचार में वे दुनिया भर की बुराई के ख़िलाफ़ सीरियाई लोगों की मदद के लिए आए हैं."

मैंने फ़ातिमा से पूछा कि अगर वह अपने बेटे को प्रोत्साहित नहीं कर रही हैं, तो उसे रोकने के लिए क्या कर रही हैं, जो अपना बचपन बेपनाह हिंसा में खोने जा रहा है?

युद्ध में

इस्लामिक स्टेट की चरमपंथी गतिविधियों में शामिल किशोर

इस पर फ़ातिमा ने कहा अगर वह लड़ने जा रहा है, तो वह उसे नहीं रोकेंगी. "युद्ध में बच्चे तेज़ी से बड़े होते हैं. मैं चाहती हूं कि वह भविष्य में बड़ा नेता बने, यानी अमीर."

धीरे-धीरे उनकी आवाज़ में तेज़ी आती गई और नकाब में उनकी आंखें गुस्से से सिकुड़ गईं.

वह बोलीं, "मुझे अफ़सोस नहीं होगा अगर मेरा बेटा पश्चिमी देशों के हाथों मारा जाता है. मुझे शर्मिंदगी है कि मेरे दूसरे बेटे बड़े आराम से बुराई के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें भी हथियार उठाना होगा."

अगर उनका बेटा इस्लामिक स्टेट के लिए लड़ते हुए मारा जाता है, तो वह कैसा महसूस करेंगी? थोड़ा ठहरकर उन्होंने जवाब में रोने के लिए अपना सिर नीचे झुकाते हुए कहा, "मुझे खुशी होगी."

संयुक्त राष्ट्र की पिछले माह की रिपोर्ट के अनुसार इस्लामिक स्टेट बड़े पैमाने पर बच्चों को भर्ती कर रहा है और कभी-कभी ऐसा ज़बर्दस्ती भी किया जाता है.

आत्मघाती

इस्लामिक स्टेट की चरमपंथी गतिविधियों में शामिल किशोर

इस्लामिक स्टेट की ओर से इंटरनेट पर जारी एक वीडियो में दिखाया गया है कि एक सैन्य हमले में बच्चों की एक बटालियन हथियार पकड़े है और इस्लामिक स्टेट के काले झंडे के पास खड़े हैं.

अन्य चरमपंथी समूह भी बच्चों को भर्ती कर रहे हैं. मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच के अनुसार ये समूह बच्चों को आत्मघाती हमलावर और निशानेबाज़ के तौर में तैनात कर रहे हैं.

तुर्की के दक्षिणी शहर गाज़ी इंताब में हमारी मुलाक़ात सीरियाई सिविल सोसायटी के एक कार्यकर्ता से हुई जिसने 13 और 15 साल के दो बच्चों को अलक़ायदा से जुड़े चरमपंथी संगठन अलनुसराह के लिए भर्ती अभियान का शिकार होते देखा था.

प्रशिक्षण

इस्लामिक स्टेट के चरमपंथी

21 वर्षीय मोहम्मद ने एक वीडियो दिखाया, जिसमें उसका छोटा भाई चरमपंथियों के एक समूह के साथ भारी स्वचालित हथियारों से गोलीबारी कर रहा था. एक दूसरी तस्वीर में वह एक मशीनगन थामे खड़ा था.

मोहम्मद के अनुसार उसने अपने भाई को अलनुसराह में शामिल होने से मना किया था, लेकिन मुझे महसूस हुआ कि उसने मेरी बिल्कुल परवाह नहीं की.

मोहम्मद कहते हैं, "उसे स्कूल में होना चाहिए था. अलनुसराह बच्चों को शामिल होने पर प्रति माह सौ डॉलर की पेशकश करता है. इसके अलावा वह उन्हें शिविरों में प्रशिक्षण के साथ हथियार भी देता है."

मोहम्मद के दोनों भाइयों को हाल ही में इस्लामिक स्टेट ने पकड़ा है. मोहम्मद को डर है कि जल्द ही इस्लामिक स्टेट के लिए वे लड़ना शुरू कर देंगे.

ईंधन

इस्लामिक स्टेट

वे कहते हैं, "मैं अपने भाई के साथ मस्ती करता था लेकिन फिर वह बदल गया और जब मैंने उससे कहा कि अलनुसराह देश को तबाह कर देगा तो वह मुझ पर चिल्लाते हुए बोला कि बकवास बंद करो नहीं तो मैं तुम्हें मार डालूंगा."

मोहम्मद के अनुसार उसने अपने दोनों भाइयों को विदा किया जो अलनुसराह में शामिल करने जा रहे थे.

"मैं सोचता हूँ कि मैं उन्हें फिर कभी नहीं देख पाऊंगा और मुझे ख़बर मिलेगी कि वे दोनों मारे गए हैं. '

सीरिया संघर्ष में पूरी पीढ़ी प्रभावित हो रही है और चरमपंथी बच्चों को युद्ध में ईंधन बनाने के लिए ला रहे हैं और बच्चों से उनकी मासूमियत छीनी जा रही है.

जब मैं अबू ख़िताब के घर से निकल रहा था तो मैंने उनकी मां फ़ातिमा से पूछा कि जब उनका बेटा अब से थोड़ा छोटा था, तो वह बड़ा होकर क्या बनना चाहता था, तो उस पर फ़ातिमा ने मुस्कुराते हुए कहा, "पायलट."

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