आप इस वेबसाइट का टेक्स्ट-ओनली वर्शन देख रहे हैं जो कम डेटा खर्च करता है. सभी तस्वीरों और वीडियो के साथ वेबसाइट का मुख्य वर्शन देखें.
यूएई के शेख़ ख़लीफ़ा बिन ज़ायेद, जिनके निधन पर भारत मना रहा है एक दिन का शोक
संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख खलीफा बिन जायेद नाहयान का निधन हो गया है.
73 साल के खलीफा बिन जायेद पिछले कुछ वक्त से बीमार चल रहे थे. भारत समेत दुनिया के कई देशों के नेताओं ने उनके निधन पर गहरा शोक जताया है.
शेख़ खलीफ़ा बिन ज़ायेद अल नहयान के निधन के एक दिन बाद शनिवार को शेख़ मोहम्मद बिन ज़ायेद अल नहयान को राष्ट्रपति चुन लिया गया है.
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों से लेकर भारत के पीएम नरेंद्र मोदी ने खलीफा और उनके योगदान को याद किया है.
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने उनके निधन पर शनिवार को एक दिन के राष्ट्रीय शोक का एलान किया है.
यूएई का असर बढ़ाने में अहम भूमिका
शेख खलीफा की छवि पश्चिमी देशों के समर्थक और एक आधुनिक नेता के तौर पर रही है.
उन्हें संयुक्त अरब अमीरात की अर्थव्यवस्था को खोलने और अबू धाबी में कई बड़े सुधारों का श्रेय दिया जाता है.
शेख खलीफा 2004 संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति बने. लेकिन 2014 में स्ट्रोक का शिकार होने के बाद शासन का रूटीन काम छोड़ दिया.
लेकिन अपने शासन काल में उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात को एक मॉर्डन और खाड़ी में एक बड़ी आर्थिक हैसियत वाला देश बना दिया.
उनके शासन में संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी एक बड़ा ट्रेड और टूरिज्म हब बन गया. उनके वक्त में खाड़ी और इससे बाहर संयुक्त अरब अमीरात का राजनीतिक प्रभाव भी बढ़ गया.
अमेरिका से नजदीकी रिश्ते
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, शेख खलीफा ने संयुक्त अरब अमीरात के शासक रहते अमेरिका से नजदीकी रिश्ते बनाए थे. हालांकि बाद के दिनों में उन्होंने अपनी रणनीति बदली.
2011 में जब अरब स्प्रिंग के दौरान अमेरिका ने मिस्र के शासक होस्नी मुबारक का साथ छोड़ दिया तो यूएई अपने बड़े समर्थक अमेरिका पर अब और भरोसा नहीं कर सकते.
रूस और यूक्रेन के जंग के दौरान भी संयुक्त अरब अमीरात ने पश्चिमी देशों के गठबंधन में शामिल होने से इनकार कर दिया
शेख खलीफा का जन्म 1948 में अबूधाबी के नखलिस्तान अल अईन में हुआ था. वह शेख जायद बिन सुल्तान अल नाहयन के सबसे बड़े बेटे थे.
पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने संस्मरण में उन्हें खाड़ी के सबसे समझदार नेताओं में से एक माना है.
करिश्माई नेता
संयुक्त अरब अमीरात ने सऊदी अरब और अमेरिका के साथ अपने संबधों को अपनी कूटनीति का आधार बनाया था.
लेकिन जब संयुक्त अरब अमीरात के आर्थिक हितों का सवाल आता था तो खलीफा स्वतंत्र नीति अपनाते थे.
शेख खलीफा को उनके देश में आधुनिक और करिश्माई नेता के तौर पर देखा जाता है. माना जाता है कि उन्होंने लो-प्रोफाइल अबू धाबी को पूरी दुनिया का ट्रेड सेंटर बना दिया.
शेख खलीफा संयुक्त अरब संयुक्त अरब अमीरात के सबसे धनी शख्स थे. फोर्ब्स की की रिपोर्ट के मुताबिक उनके नियंत्रण में 97.8 अरब बैरल का तेल रिजर्व था.
संयुक्त अरब अमीरात दुनिया के सबसे बड़े सॉवरेन वेल्थ फंड्स में से एक प्रबंधन करता है. इसकी कुल संपत्ति लगभग 830 अरब डॉलर की है.
शेख खलीफा को दुबई के बुर्ज खलीफा से भी जोड़ा जाता है. यह दुनिया की सबसे लंबी बिल्डिंग है. खलीफा के सम्मान में इस बिल्डिंग का नाम बुर्ज दुबई से बदल कर बुर्ज खलीफा कर दिया था.
उनका प्रभाव इसी बात से आंका जा सकता है कि उनकी मंजूरी के बाद ही यूएई ने इस्लामी देशों के कट्टर दुश्मन इजरायल के साथ दोस्ती की थी.
राजनीतिक इस्लामवाद के खिलाफ कदम
साल 2011 में अरब स्प्रिंग के दौर में शेख खलीफा की सरकार ने कई देशों में मजबूत नेताओं का साथ दिया और राजनीतिक इस्लामवाद के खिलाफ कदम उठाए.
उनकी सेना अफगानिस्तान में अमेरिका के साथ मिल कर लड़ी.
संयुक्त अरब अमीरात ने सीरिया और इराक में इस्लामिक स्टेट के खिलाफ रुख अपनाया और 2015 में यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब का साथ दिया
उनके शासन काल में ही अमीरात और बहरीन ने 2020 में इसराइल से औपचारिक राजनयिक संबंध कायम किए.
पिछले तीन दशक में किसी अरब देश की इसराइल से संबंध बनाने का यह पहला कदम था.
अमीरात में शेख खलीफा का व्यक्तित्व हर तरफ छाया हुआ है.
बीमार होने के बाद उनकी सार्वजनिक उपस्थिति भले काफी कम हो गई थी लेकिन यहां उनकी तस्वीर हर तरफ दिखती है.
सरकारी दफ्तरों की दीवारों से लेकर होटलों मे रिस्पेशन डेस्क के पीछे तक.
वह राष्ट्रपति होने के साथ ही सेना के चीफ, इनवेस्टमेंट फंड के प्रमुख और पेट्रोलियम काउंसिल के अध्यक्ष थे.
यह काउंसिल ही यूएई की तेल नीति का प्रबंधन देखती है. स्ट्रोक के बाद उन्होंने शासन का जिम्मा अपने सौतेले भाई मोहम्मद बिन जायेद अल नाहयान को सौंप दिया.
वह अबु धाबी के क्राउन प्रिंस और ज्यादा आक्रामक विदेश नीति के लिए जाने जाते हैं.
शेख खलीफा ब्रिटेन से अपने पिता का हाथ बंटाने लौटे थे. 1971 में संयुक्त अरब अमीरात की आजादी और उनके पिता के हाथ शासन की कमान मिलने के बाद उनकी भूमिका बढ़ती गई.
खलीफा पेट्रोलियम काउंसिल के प्रमुख बन गए, जो तेल संसाधन से लैस इस देश के सबसे अहम पदों में से एक था.
तेल संसाधनों से भरपूर पर्सियन गल्फ के दूसरी राजशाहियों की तरह अमीरात ने भी बाहरी चुनौतियों से जूझने के लिए अमेरिका से नजदीका संबंध बनाए रखा.
अमीरात अमेरिकी हथियारों के प्रमुख ग्राहकों में एक रहा है. लेकिन रूस और यूक्रेन के बीच जंग ने अमेरिका और अमीरात के संबंधों में खटास पैदा कर दी.
अमेरिका और पश्चिमी देश यूक्रेन के खिलाफ अपने सैन्य गठबंधन में यूएई को शामिल करना चाहते थे. लेकिन अमीरात इसके लिए राजी नहीं था.
संयुक्त राष्ट्र में रूस पर वोटिंग के दौरान भी संयुक्त अरब अमीरात गैर मौजूद रहा. संयुक्त अरब अमीरात का मानना है कि ईरान के खिलाफ भी उसे अमेरिका का खास सहयोग नहीं मिल रहा है.
भारत के साथ मजबूत होते संबंध
शेख खलीफा के निधन पर भारत ने एक दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है. भारत से उनके मजबूत संबंधों के बारे में ये बताने के लिए काफी है.
साल 2017 में भारत ने गणतंत्र दिवस की परेड में मोहम्मद बिन जायेद अल नाहयान को मुख्य अतिथि बनाया था.
हाल के दिनों में भारत और यूएई बड़े कारोबारी और निवेश सहयोगी बन कर उभरे हैं. यूएई भारत का तीसरा सबसे बड़ा कारोबारी पार्टनर है.
मौजूदा वित्त वर्ष में दोनों देशों के बीच का कारोबार 60 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है. गैर तेल निर्यात के मामले में भारत यूएई का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है.
भारत और यूएई के बीच का कारोबार अगले पांच साल में बढ़ कर 100 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकतेहैं.)