अमरीका में कितने ताकतवर रह गए हैं ओबामा?

राष्ट्रपति बराक ओबामा
    • Author, सूरत सिंह
    • पदनाम, सुप्रीम कोर्ट में वकील और राष्ट्रपति ओबामा के सहपाठी
  • प्रकाशित

साल 2008 में जब बराक ओबामा पहली बार अमरीका के राष्ट्रपति बने थे तो लोगों को उनसे बहुत उम्मीदें थीं. अमरीका में उन्हें एक नई लहर की तरह देखा गया था.

और अब बतौर राष्ट्रपति उनके छह साल हो गए हैं, यहां से उनके कार्यकाल के ढलान की शुरुआत कही जा सकती है. दो साल बाद वो राष्ट्रपति नहीं रहेंगे.

अमरीका में जब किसी राष्ट्रपति के कार्यकाल के दो साल बचे रह जाते हैं तो उसे 'लेम-डक' राष्ट्रपति कहा जाता है.

यानी, ऐसा राष्ट्रपति जो बड़े फैसले ले पाने की स्थिति में नहीं होता है. ख़ास कर इस वक्त जब कांग्रेस के दोनों ही सदनों में विपक्षी रिपब्लकिन पार्टी का बहुमत है.

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हिलेरी क्लिंटन के साथ बराक ओबामा.

ओबामा जब दूसरी बार निर्वाचित हुए थे तो उनके पास मौका था. उस वक्त उन्हें सोचना चाहिए था कि वे इतिहास में अपनी विरासत के तौर पर क्या छोड़ जाएंगे. और इतिहास उन्हें किस तरह से याद करेगा.

लोग उम्मीद कर रहे थे कि वे भी अब्राहम लिंकन, जॉर्ज वाशिंगटन, फ़्रैंकलिन डी रुज़वेल्ट जैसे महान राष्ट्रपतियों की कतार में शामिल हों.

इसमें कोई संदेह नहीं है कि बराक ओबामा ने अच्छा काम किया है और वे एक अच्छे राष्ट्रपति के तौर पर याद किए जाएंगे.

लेकिन महान राष्ट्रपति बनने के लिए उन्हें अभी कड़े फैसले लेने होंगे.

अब्राहम लिंकन ने दास प्रथा खत्म करने जैसा कड़ा फैसला लिया और इतिहास में दर्ज गए. ओबामा भी लिंकन को ही अपना आदर्श मानते हैं.

प्रतीकात्मक महत्व

राष्ट्रपति बराक ओबामा

ओबामा ने अल कायदा के नेता ओसामा बिन लादेन को ख़त्म किया, अफ़ग़ानिस्तान और इराक़ से सैनिक वापस बुला लिए, अमरीका की अर्थव्यवस्था के लिए उन्होंने बहुत कुछ किया है.

लेकिन अंतरराष्ट्रीय चरमपंथ के मुद्दे पर जितने कड़े फैसले लिए जाने चाहिए थे, वे नहीं लिए गए.

अमरीकी राष्ट्रपतियों के साथ बराक ओबामा.

अभी दो साल उनके पास हैं. लेमडक राष्ट्रपति होने के बावजूद भी उनकी कही गई बातों का प्रतीकात्मक महत्व है.

अमरीका में राष्ट्रपति का कार्यकाल चार साल का होता है जिसमें पहले दो साल गंभीरतापूर्वक काम होता है.

आखिरी दो सालों में ध्यान इस बात पर होता है कि कौन अगला राष्ट्रपति बनेगा.

वीटो पावर

अमरीकी अर्थव्यवस्था

अब कांग्रेस के दोनों सदनों में रिपब्लिकनों को वर्चस्व हो गया है. ऐसी स्थिति में ओबामा की ताकत सीमित हो जाती है लेकिन उनके पास वीटो पावर है.

वे चाहें तो ख़ास स्थितियों में इसका इस्तेमाल कर सकते हैं और कुछ नए कदम भी उठा सकते हैं.

राष्ट्रपति बराक ओबामा

भले ही वीटो पावर का इस्तेमाल असाधारण परिस्थितियों में ही किया जाता हो लेकिन राष्ट्रपति के पास इसका विकल्प तो रहता ही है.

ओबामा रिपब्लिकन और डेमोक्रेट के बीच तमाम कोशिशों के बावजूद तालमेल नहीं बिठा सके. लेकिन यह अमरीकी सिस्टम की ख़ामी ज़्यादा कही जा सकती है.

एक तरीके से कहा जाए तो अमरीकी राष्ट्रपति अपनी व्यवस्था के क़ैदी की तरह होते हैं.

(हॉर्वर्ड यूनीवर्सिटी में राष्ट्रपति ओबामा के सहपाठी रहे एडवोकेट सूरत सिंह के साथ बीबीसी संवाददाता ज़ुबैर अहमद की बातचीत)

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